सरहुल: प्रकृति और नए साल का त्योहार

सरहुल: प्रकृति और नए साल का त्योहार

सरहुल झारखंड और आसपास के क्षेत्रों में उरांव, मुंडा, हो और कई अन्य आदिवासी समुदायों का प्रमुख त्योहार है। यह चैत्र महीने में मनाया जाता है, जब साल (सखुआ) के पेड़ों पर नए फूल आते हैं। कई समुदायों के लिए यह नए साल की शुरुआत भी है।

पूजा और परंपरा

गाँव के पाहन (पुजारी) सरना स्थल पर साल के फूलों से पूजा करते हैं और गाँव की खुशहाली, अच्छी बारिश और अच्छी फसल की कामना करते हैं। पूजा के बाद साल के फूल घर-घर बाँटे जाते हैं।

नाच-गान और सामूहिकता

मांदर और नगाड़े की थाप पर पूरा गाँव मिलकर नाचता-गाता है। सरहुल हमें सिखाता है कि मनुष्य प्रकृति का हिस्सा है, मालिक नहीं।

"धरती हमारी माँ है, और जंगल हमारा घर।"